27/10/2026
बिहार के सरकारी स्कूलों में 5 से 8 लाख बच्चों को रोज नहीं मिल रहा मिड-डे मील! 6 महीने का बकाया नहीं मिला तो 1 नवंबर से खाना बंद करने की चेतावनी....
बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मिड-डे मील की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। शिक्षा विभाग के ई-शिक्षाकोष पोर्टल की समीक्षा और डेटा ऑडिट के मुताबिक, राज्य के 71,567 सरकारी स्कूलों में रोजाना औसतन 5 से 8 लाख बच्चों तक भोजन नहीं पहुंच पा रहा है। समीक्षा में 38 में से 28 जिलों में भोजन का कवरेज 85% से कम पाया गया। मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी और शिवहर में यह 80 से 85% के बीच है, जबकि गोपालगंज, दरभंगा, समस्तीपुर और गया में फंड की कमी व स्थानीय समस्याओं से भोजन प्रभावित होने की बात सामने आई है।
विभाग ने लापरवाही पर कार्रवाई शुरू कर दी है। मिड-डे मील निदेशक विनायक मिश्र ने 30 जिलों के डीपीओ और डीपीएम को कारण बताओ नोटिस जारी कर दो कार्य दिवसों में जवाब मांगा है। लापरवाही पर हेडमास्टर का वेतन रोकने और समय पर राशन नहीं पहुंचाने वाले सप्लायरों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। आगे स्कूलों के खातों में बफर फंड रखने, राशन वाहनों की GPS ट्रैकिंग और रसोइयों को समय पर मानदेय देने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
इधर, बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि छह महीने का बकाया भुगतान एक सप्ताह के भीतर नहीं हुआ, तो 1 नवंबर 2026 से राज्यभर में मिड-डे मील का संचालन बंद किया जा सकता है। संघ के सचिव आनंद मिश्र के मुताबिक, शिक्षक अपने खर्च पर खाद्य सामग्री खरीदकर भोजन चला रहे हैं। वहीं, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि सभी स्कूलों में भोजन की निगरानी की जा रही है और जहां खाना नहीं मिल रहा, वहां कार्रवाई की जा रही है।
मुख्य बातें:
🔹 राज्य के सरकारी स्कूलों में रोजाना 5 से 8 लाख बच्चों को भोजन नहीं मिलने का दावा।
🔹 38 में से 28 जिलों में मिड-डे मील कवरेज 85% से कम।
🔹 30 जिलों के अधिकारियों से दो कार्य दिवसों में जवाब मांगा गया।
🔹 छह महीने का बकाया भुगतान नहीं होने पर 1 नवंबर से भोजन बंद करने की चेतावनी।
🔹 राशन वाहनों की GPS ट्रैकिंग और स्कूलों में बफर फंड की व्यवस्था पर जोर।
आपके इलाके के सरकारी स्कूलों में बच्चों को नियमित मिड-डे मील मिल रहा है या नहीं? अपना अनुभव कमेंट में बताएं और यह खबर अभिभावकों तक साझा करें।