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बिहार के सरकारी स्कूलों में 5 से 8 लाख बच्चों को रोज नहीं मिल रहा मिड-डे मील! 6 महीने का बकाया नहीं मिला तो 1 नवंबर से ख...
27/10/2026

बिहार के सरकारी स्कूलों में 5 से 8 लाख बच्चों को रोज नहीं मिल रहा मिड-डे मील! 6 महीने का बकाया नहीं मिला तो 1 नवंबर से खाना बंद करने की चेतावनी....

बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मिड-डे मील की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। शिक्षा विभाग के ई-शिक्षाकोष पोर्टल की समीक्षा और डेटा ऑडिट के मुताबिक, राज्य के 71,567 सरकारी स्कूलों में रोजाना औसतन 5 से 8 लाख बच्चों तक भोजन नहीं पहुंच पा रहा है। समीक्षा में 38 में से 28 जिलों में भोजन का कवरेज 85% से कम पाया गया। मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी और शिवहर में यह 80 से 85% के बीच है, जबकि गोपालगंज, दरभंगा, समस्तीपुर और गया में फंड की कमी व स्थानीय समस्याओं से भोजन प्रभावित होने की बात सामने आई है।

विभाग ने लापरवाही पर कार्रवाई शुरू कर दी है। मिड-डे मील निदेशक विनायक मिश्र ने 30 जिलों के डीपीओ और डीपीएम को कारण बताओ नोटिस जारी कर दो कार्य दिवसों में जवाब मांगा है। लापरवाही पर हेडमास्टर का वेतन रोकने और समय पर राशन नहीं पहुंचाने वाले सप्लायरों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। आगे स्कूलों के खातों में बफर फंड रखने, राशन वाहनों की GPS ट्रैकिंग और रसोइयों को समय पर मानदेय देने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।

इधर, बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि छह महीने का बकाया भुगतान एक सप्ताह के भीतर नहीं हुआ, तो 1 नवंबर 2026 से राज्यभर में मिड-डे मील का संचालन बंद किया जा सकता है। संघ के सचिव आनंद मिश्र के मुताबिक, शिक्षक अपने खर्च पर खाद्य सामग्री खरीदकर भोजन चला रहे हैं। वहीं, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि सभी स्कूलों में भोजन की निगरानी की जा रही है और जहां खाना नहीं मिल रहा, वहां कार्रवाई की जा रही है।

मुख्य बातें:
🔹 राज्य के सरकारी स्कूलों में रोजाना 5 से 8 लाख बच्चों को भोजन नहीं मिलने का दावा।
🔹 38 में से 28 जिलों में मिड-डे मील कवरेज 85% से कम।
🔹 30 जिलों के अधिकारियों से दो कार्य दिवसों में जवाब मांगा गया।
🔹 छह महीने का बकाया भुगतान नहीं होने पर 1 नवंबर से भोजन बंद करने की चेतावनी।
🔹 राशन वाहनों की GPS ट्रैकिंग और स्कूलों में बफर फंड की व्यवस्था पर जोर।

आपके इलाके के सरकारी स्कूलों में बच्चों को नियमित मिड-डे मील मिल रहा है या नहीं? अपना अनुभव कमेंट में बताएं और यह खबर अभिभावकों तक साझा करें।

बिहार में सरकारी राशन की गुणवत्ता पर सवाल, मंत्री बोले—कबूतर ने भी नहीं खाया चावल; जांच के आदेश, PDS पर नजर रखेगी फ्लाइं...
27/10/2026

बिहार में सरकारी राशन की गुणवत्ता पर सवाल, मंत्री बोले—कबूतर ने भी नहीं खाया चावल; जांच के आदेश, PDS पर नजर रखेगी फ्लाइंग स्क्वॉड.....

बिहार में जन वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाले सरकारी चावल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठा है। राज्य स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक में जनजाति कल्याण विभाग के मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने वैशाली जिले का मामला उठाते हुए कहा कि चावल इतना खराब था कि कबूतर को देने पर भी उसने उसे नहीं खाया। उनके मुताबिक, दो दिनों तक चावल वैसे ही पड़ा रहा। इस शिकायत पर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री डॉ. अशोक चौधरी ने विभागीय सचिव को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होगी।

इसी बैठक में बिहार की राशन व्यवस्था की निगरानी मजबूत करने के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड गठित करने का फैसला भी लिया गया। अधिकारियों को योजनाओं की नियमित निगरानी और शिकायतों का जल्द निपटारा करने को कहा गया है। बैठक में राशन कार्ड, PDS दुकानों के लाइसेंस, स्मार्ट PDS और धान खरीद की भी समीक्षा हुई। मंत्री ने स्पष्ट किया कि पात्र लाभुकों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में PDS दुकानों की 4,910 रिक्तियों के लिए विज्ञापन जारी हुआ है और 50,031 आवेदन मिले हैं। अब तक 1,237 नए लाइसेंस जारी किए गए हैं। नए राशन कार्ड के लिए मिले 13,93,704 आवेदनों में से 7,40,925 कार्ड जारी किए जा चुके हैं। वहीं, राशन कार्डों में 14,61,286 नए सदस्यों के नाम जोड़े गए हैं।

मुख्य बातें:
🔹 वैशाली में सरकारी चावल की गुणवत्ता पर मंत्री ने उठाए सवाल।
🔹 खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव को जांच का निर्देश।
🔹 PDS की निगरानी के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड गठित होगी।
🔹 राशन दुकानों की 4,910 रिक्तियों के लिए 50,031 आवेदन मिले।
🔹 नए राशन कार्ड के 7,40,925 आवेदन स्वीकृत कर कार्ड जारी किए गए।

आपके इलाके में सरकारी राशन की गुणवत्ता कैसी है? अपना अनुभव कमेंट में बताएं और यह खबर जरूरतमंद लोगों तक साझा करें।

बिहार में 6 अंचल अधिकारियों पर कार्रवाई, गलत जाति प्रमाण-पत्र जारी करने के आरोप में पूर्व CO पर FIR का आदेश; कई की वेतनव...
27/10/2026

बिहार में 6 अंचल अधिकारियों पर कार्रवाई, गलत जाति प्रमाण-पत्र जारी करने के आरोप में पूर्व CO पर FIR का आदेश; कई की वेतनवृद्धि रुकी.....

बिहार में जमीन के दाखिल-खारिज से लेकर जाति प्रमाण-पत्र और सरकारी धन के इस्तेमाल तक के मामलों में लापरवाही और अनियमितता के आरोपों पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सख्ती दिखाई है। किशनगंज के ठाकुरगंज के तत्कालीन अंचलाधिकारी ओमप्रकाश भगत पर गलत तरीके से पिछड़ा वर्ग का जाति प्रमाण-पत्र जारी करने का आरोप है। विभाग ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया है। इस मामले में संबंधित राजस्व अधिकारी और राजस्व कर्मचारी पर भी FIR का आदेश दिया गया है। विभाग ने भगत की दो वेतनवृद्धि रोकने का भी फैसला किया है।

इसके अलावा, किशनगंज के तत्कालीन CO निश्चल प्रेम पर बिना कार्यादेश अग्रिम भुगतान और वित्तीय अनियमितता के आरोपों की जांच के साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया गया है। रोहतास के अकोढ़ी गोला के पूर्व CO जितेंद्र कुमार सिंह की दाखिल-खारिज और जमाबंदी में लापरवाही के आरोप में तीन वेतनवृद्धि रोक दी गई हैं। कटिहार के बरारी के पूर्व CO ललन कुमार मंडल के खिलाफ अतिक्रमण और सरकारी आदेश की अवहेलना के मामले में आरोप पत्र गठित किया गया है।

वहीं, कटिहार के मनसाही के पूर्व CO महेश प्रसाद सिंह पर अदालत के आदेश के विपरीत म्यूटेशन स्वीकृत करने के आरोप में दो वेतनवृद्धि रोकी गई हैं। गोपालगंज के हथुआ के तत्कालीन CO राज नारायण राजा के खिलाफ दाखिल-खारिज के मामले लंबित रखने के आरोप में आरोप पत्र गठित किया गया है।

मुख्य बातें:
🔹 ठाकुरगंज के पूर्व CO ओमप्रकाश भगत के खिलाफ FIR का निर्देश।
🔹 संबंधित राजस्व अधिकारी और कर्मचारी पर भी प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश।
🔹 किशनगंज के पूर्व CO निश्चल प्रेम के खिलाफ वित्तीय अनियमितता की जांच होगी।
🔹 रोहतास के पूर्व CO की तीन और कटिहार के मनसाही के पूर्व CO की दो वेतनवृद्धि रोकी गईं।
🔹 बरारी और हथुआ के पूर्व CO के खिलाफ आरोप पत्र गठित किए गए हैं।

आपके अंचल में दाखिल-खारिज, जमाबंदी या प्रमाण-पत्र से जुड़ी समस्याएं समय पर सुलझ रही हैं? अपना अनुभव कमेंट में बताएं।

बिहार के 3.50 लाख घरों में मार्च 2027 तक पाइप से पहुंचेगी गैस, 15 जिलों में अब तक एक भी PNG कनेक्शन नहीं!.....बिहार में ...
26/10/2026

बिहार के 3.50 लाख घरों में मार्च 2027 तक पाइप से पहुंचेगी गैस, 15 जिलों में अब तक एक भी PNG कनेक्शन नहीं!.....

बिहार में अब रसोई तक पाइप से गैस पहुंचाने की तैयारी तेज हो गई है। मार्च 2027 तक राज्य के 3.50 लाख घरों में PNG कनेक्शन चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 1.52 लाख से अधिक घरों में कनेक्शन पहुंच चुका है और वहां पाइप से गैस पर खाना बन रहा है। अगले पांच महीनों में करीब दो लाख नए घरों को जोड़ने की योजना है, यानी हर महीने औसतन 40 हजार घरों में कनेक्शन चालू करना होगा।

हालांकि, कई जिलों में अभी PNG का नेटवर्क शुरू ही नहीं हो पाया है। अररिया, किशनगंज, अरवल, जहानाबाद, बक्सर, खगड़िया, भागलपुर, नवादा, शिवहर, सीतामढ़ी, सुपौल, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण और सीवान समेत खबर में सूचीबद्ध 14 जिलों में अब तक एक भी घर तक PNG नहीं पहुंची है। एजेंसियों का कहना है कि नवंबर 2026 तक तकनीकी और प्रशासनिक बाधाएं दूर करने के बाद दिसंबर से इन जिलों में रोजाना 50 से 100 नए कनेक्शन देने का लक्ष्य है।

काम में सबसे बड़ी अड़चन सड़क खोदने की अनुमति यानी NOC मिलने में देरी है। पथ निर्माण विभाग और नगर निकायों से अनुमति मिलने में महीनों लग रहे हैं। अब इसे दो-तीन दिनों में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। पुराने शहरों की संकरी गलियों और बहुमंजिली इमारतों में सुरक्षा मंजूरी की जटिलताओं के कारण भी कनेक्शन चालू होने में देरी हो रही है। धीमी रफ्तार वाले जिलों में संबंधित डीएम की निगरानी में विशेष कार्ययोजना लागू की जाएगी।

मुख्य बातें:
🔹 मार्च 2027 तक 3.50 लाख घरों में PNG कनेक्शन चालू करने का लक्ष्य।
🔹 अब तक 1.52 लाख से अधिक घरों में पहुंच चुकी है पाइप से गैस।
🔹 अगले पांच महीनों में करीब दो लाख नए कनेक्शन देने की योजना।
🔹 NOC की प्रक्रिया दो-तीन दिनों में पूरी करने के निर्देश।
🔹 पटना में सबसे अधिक 40,354 कनेक्शन, जबकि मुजफ्फरपुर में 21,451 कनेक्शन दर्ज हैं।

आपके जिले में PNG कनेक्शन की सुविधा पहुंची है या अब भी LPG सिलेंडर पर निर्भर हैं? कमेंट में बताएं और यह जानकारी दूसरों तक भी पहुंचाएं।

घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना या पारिवारिक विवाद से परेशान हैं महिलाएं? बिहार में 260 दीदी अधिकार केंद्र दे रहे मदद, 421 क...
26/10/2026

घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना या पारिवारिक विवाद से परेशान हैं महिलाएं? बिहार में 260 दीदी अधिकार केंद्र दे रहे मदद, 421 करने का लक्ष्य.....

बिहार में घरेलू हिंसा, दहेज के लिए प्रताड़ना और सामाजिक उत्पीड़न जैसी समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को अब सहायता और उचित परामर्श देने के लिए जीविका के दीदी अधिकार केंद्र काम कर रहे हैं। राज्य के सभी 38 जिलों में करीब 260 केंद्र संचालित हैं, जहां महिलाएं अपनी समस्याएं रख सकती हैं और आगे की कार्रवाई के लिए मार्गदर्शन पा सकती हैं। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक 51 हजार से अधिक महिलाओं को सहायता दी जा चुकी है।

ग्रामीण विकास एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और सरकारी सुविधाओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है। उनके मुताबिक, इन केंद्रों से महिलाओं को अपनी बात रखने, उचित सलाह लेने और न्याय की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिल रही है। केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 421 करने का लक्ष्य रखा गया है।

महिलाओं को कानूनी सलाह देने के लिए पटना स्थित चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (CNLU) में भी सहायता केंद्र बनाया गया है। इसके अलावा, जरूरतमंद महिलाओं को राशन कार्ड, पेंशन, आधार, वीबी-जी राम जी, आवास और दिव्यांगजन कल्याण योजनाओं का लाभ लेने में भी सहयोग दिया जाएगा।

मुख्य बातें:
🔹 बिहार के सभी 38 जिलों में करीब 260 दीदी अधिकार केंद्र संचालित।
🔹 51 हजार से अधिक महिलाओं को मिल चुकी है सहायता।
🔹 केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 421 करने का लक्ष्य।
🔹 घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना और सामाजिक उत्पीड़न के मामलों में परामर्श व मार्गदर्शन।
🔹 सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और जरूरी दस्तावेज तैयार कराने में भी मदद।

आपके जिले में दीदी अधिकार केंद्र की जानकारी लोगों तक पहुंची है? अपनी राय कमेंट में बताएं और इस जानकारी को जरूरतमंद महिलाओं तक जरूर साझा करें।

बिहार में जमीन के काम के लिए बार-बार अभियान, लेकिन हड़ताल के कारण रैयतों को राहत नहीं! जमाबंदी अभियान में भी कामकाज ठप.....
25/10/2026

बिहार में जमीन के काम के लिए बार-बार अभियान, लेकिन हड़ताल के कारण रैयतों को राहत नहीं! जमाबंदी अभियान में भी कामकाज ठप....

बिहार में जमीन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए पिछले दो वर्षों में तीन विशेष अभियान चलाए गए, लेकिन इनका अपेक्षित लाभ लोगों तक नहीं पहुंच सका। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने रैयतों की परेशानी कम करने के लिए महाअभियान और जमीन मापी अभियान शुरू किए, मगर इन अभियानों के दौरान ही विभाग के अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल या सामूहिक अवकाश पर चले गए। अब डेढ़ महीने से चल रहे जमाबंदी अभियान पर भी इसका असर पड़ रहा है।

विभागीय समीक्षा में सामने आया कि कई जिलों में जमाबंदी से जुड़े केवल दो-चार मामलों का ही निबटारा हो पाया है। कुछ ही जिले ऐसे हैं, जहां 100 से अधिक मामलों का समाधान हुआ है। अंचलाधिकारी, राजस्व अधिकारी, राजस्व कर्मचारी और अमीन के काम प्रभावित होने से अभियान की रफ्तार धीमी पड़ गई। पहले भी काम पूरा नहीं होने पर अभियान की अवधि बढ़ानी पड़ी थी।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य रैयतों को जमीन से जुड़े कामों में सुविधा देना है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की है। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि अभियान चलने के बावजूद जमीन संबंधी काम के लिए लोगों को कितनी राहत मिल पा रही है।

मुख्य बातें:

- पिछले दो वर्षों में जमीन से जुड़े तीन विशेष अभियान चलाए गए।

- अभियानों के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों की हड़ताल से काम प्रभावित हुआ।

- मौजूदा डेढ़ महीने के जमाबंदी अभियान में भी कई जिलों में बहुत कम मामलों का निबटारा हुआ।

- कुछ ही जिलों में 100 से अधिक मामलों का समाधान हो पाया।

- विभागीय सचिव जय सिंह ने कर्मियों और अधिकारियों से काम पर लौटने की अपील की है।

आपके अंचल में जमाबंदी या जमीन से जुड़ा काम हो रहा है या अब भी अटका है? अपना जिला और परेशानी कमेंट में बताएं, ताकि लोगों की स्थिति सामने आ सके।

बिहार में 87 लाख लोगों के नाम ग्रामीण आवास की सूची में आने की संभावना, 31 अक्टूबर तक पंचायतों में लगेगी अंतिम सूची.....प...
25/10/2026

बिहार में 87 लाख लोगों के नाम ग्रामीण आवास की सूची में आने की संभावना, 31 अक्टूबर तक पंचायतों में लगेगी अंतिम सूची.....

प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत बिहार में नए घर के लिए पात्र लोगों की सूची अब अंतिम चरण में पहुंच रही है। आवास प्लस 2.0 सर्वे में सामने आए नामों की ग्रामसभा में जांच के बाद करीब 87 लाख लाभुकों के नाम पर मुहर लगने की संभावना है। ग्रामीण विकास विभाग को मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक, अंतिम सूची 31 अक्टूबर तक पंचायतों के नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक की जाएगी।

राज्य के सभी 38 जिलों में हुए सर्वे में कुल 1 करोड़ 4 लाख 90 हजार 743 लोगों के नाम आवास पाने की पात्रता के लिए सामने आए थे। तीन स्तरों पर जांच के बाद प्रारूप सूची तैयार की गई और फिर यह सूची ग्रामसभा में रखी गई, ताकि तय किया जा सके कि संबंधित लोग योजना के लिए पात्र हैं या नहीं। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, ग्रामसभाओं ने लगभग 87 लाख नामों को मंजूरी दी है। हालांकि, यह आंकड़ा अभी अंतिम नहीं है।

शुरुआत में विभाग को उम्मीद थी कि ग्रामसभा की जांच में करीब 60 लाख नाम ही सूची में बचेंगे। लेकिन अब लगभग 87 लाख नामों पर सहमति मिलने की संभावना जताई जा रही है। खबर में यह भी बताया गया है कि आगामी पंचायत चुनाव के कारण अपात्र लोगों के नाम हटाने में पंचायत प्रतिनिधियों के हिचकने की आशंका है। अंतिम स्थिति पंचायतों में सूची सार्वजनिक होने के बाद स्पष्ट होगी।

मुख्य बातें:

- ग्रामीण आवास योजना की सूची में करीब 87 लाख नाम आने की संभावना।

- सर्वे में 1,04,90,743 लोगों के नाम पात्रता के लिए सामने आए थे।

- ग्रामसभा में लाभुकों की पात्रता की जांच के बाद नामों पर मुहर लगाई गई है।

- 31 अक्टूबर तक अंतिम सूची पंचायत के नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करने की योजना है।

- अंतिम सूची से ही स्पष्ट होगा कि किन लोगों के नाम आवास के लिए पात्र लाभुकों में शामिल हैं।

क्या आपने आवास प्लस 2.0 सर्वे में अपना नाम दर्ज कराया था? अंतिम सूची जारी होने पर अपने पंचायत के नोटिस बोर्ड पर जरूर जांचें और यह जानकारी जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाएं।

बिहार के 700 मॉडल स्कूलों में 31 मार्च तक स्मार्ट क्लास, छठी से कंप्यूटर की पढ़ाई होगी अनिवार्य!......बिहार के सरकारी स्...
24/10/2026

बिहार के 700 मॉडल स्कूलों में 31 मार्च तक स्मार्ट क्लास, छठी से कंप्यूटर की पढ़ाई होगी अनिवार्य!......

बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अब कंप्यूटर शिक्षा देने की तैयारी तेज हो गई है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के मुताबिक, राज्य के सभी 700 सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूलों) में 31 मार्च से पहले स्मार्ट क्लास बनाई जाएगी। अगले शैक्षणिक सत्र से सरकारी स्कूलों में छठी और उससे ऊपर की कक्षाओं के लिए कंप्यूटर शिक्षा अनिवार्य करने की तैयारी है। इसके लिए पहले शिक्षकों को SCERT में कंप्यूटर का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे बच्चों को बेहतर तरीके से पढ़ा सकें।

शिक्षा मंत्री ने समीक्षा बैठक में स्कूलों की आधारभूत सुविधाएं दुरुस्त करने और जिन आदर्श विद्यालयों में चहारदीवारी नहीं है, वहां निर्माण कराने का निर्देश दिया। राज्य के हर प्रमंडल में गुरुकुलम विद्यापीठ शुरू करने की योजना पर भी काम होगा। इसकी शुरुआत बक्सर से की जा चुकी है, जहां पहले गुरुकुलम की स्थापना पर करीब 70 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके अलावा, जमीन उपलब्ध होने वाले बंद राजकीय संस्कृत विद्यालयों का जीर्णोद्धार कर उन्हें दोबारा शुरू करने की तैयारी है।

बैठक में बिहार दिवस पर बड़े आयोजन की योजना भी सामने आई। मुख्य समारोह पटना के बापू सभागार में करने और कवि डॉ. कुमार विश्वास को आमंत्रित करने की योजना है। शिक्षा मंत्री ने पीएमश्री योजना, शिक्षा भवनों के निर्माण और स्कूलों की जरूरी सुविधाओं से जुड़े कार्यों में भी तेजी लाने का निर्देश दिया।

मुख्य बातें:

- 700 मॉडल स्कूलों में 31 मार्च से पहले स्मार्ट क्लास बनाने का लक्ष्य।

- अगले शैक्षणिक सत्र से छठी और उससे ऊपर की कक्षाओं में कंप्यूटर शिक्षा अनिवार्य करने की तैयारी।

- कंप्यूटर पढ़ाने से पहले शिक्षकों को SCERT में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

- हर प्रमंडल में गुरुकुलम विद्यापीठ बनाने की योजना; बक्सर से शुरुआत हो चुकी है।

- जमीन वाले बंद राजकीय संस्कृत विद्यालयों का जीर्णोद्धार कर उन्हें फिर शुरू करने की तैयारी।

आपके इलाके के सरकारी स्कूल में स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर की पढ़ाई की सुविधा है? कमेंट में अपने जिले का नाम बताएं और यह खबर दूसरे अभिभावकों तक भी पहुंचाएं।

#शिक्षाविभाग

बिहार में 10,626 नल-जल योजनाएं बंद, आधे से ज्यादा मामलों में कार्रवाई की रिपोर्ट तक नहीं! सारण की स्थिति सबसे खराब....बि...
24/10/2026

बिहार में 10,626 नल-जल योजनाएं बंद, आधे से ज्यादा मामलों में कार्रवाई की रिपोर्ट तक नहीं! सारण की स्थिति सबसे खराब....

बिहार में नल से पानी पहुंचाने वाली 10,626 जलापूर्ति योजनाएं बंद पड़ी हैं। चिंता की बात यह है कि इनमें से 5,365 मामलों में अब तक कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) अपलोड नहीं हुई है। यानी करीब 50.5 फीसदी मामलों में कार्रवाई की रिपोर्ट लंबित है। इन योजनाओं के बंद रहने से लोगों को नल-जल का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

जिलों के आंकड़े देखें तो सारण की स्थिति सबसे खराब है। यहां 261 बंद योजनाओं में से 250 मामलों की कार्रवाई रिपोर्ट लंबित है। दरभंगा में 250 में से 207 और मुजफ्फरपुर में 244 में से 183 मामलों में रिपोर्ट अपलोड नहीं हुई है। रोहतास में बंद योजनाओं की संख्या सबसे अधिक 1,114 है, जिनमें 691 मामलों की रिपोर्ट लंबित है। वहीं, सीवान में 984 में से 477, मधेपुरा में 766 में से 414 और मधुबनी में 686 में से 294 मामलों में रिपोर्ट अपलोड होना बाकी है।

इस मामले में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) ने शिकायतों के निबटारे में तेजी लाने का निर्देश दिया है। विशेष सचिव की अध्यक्षता में कार्यपालक अभियंताओं के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद CGRC पोर्टल पर लंबित शिकायतों के निबटारे में लापरवाही को लेकर 10 कार्यपालक अभियंताओं से स्पष्टीकरण मांगा गया है। अब इन बंद योजनाओं पर कार्रवाई और शिकायतों के समाधान की स्थिति पर नजर रहेगी।

मुख्य बातें:

- बिहार में 10,626 नल-जल योजनाएं बंद हैं।
- 5,365 मामलों में कार्रवाई रिपोर्ट लंबित है, जबकि 5,261 में रिपोर्ट अपलोड की गई है।
- सारण में 261 में से 250 मामलों की रिपोर्ट लंबित है।
- रोहतास में सबसे अधिक 1,114 बंद योजनाएं दर्ज हैं।
- शिकायतों के निबटारे में लापरवाही पर 10 कार्यपालक अभियंताओं से जवाब मांगा गया है।

आपके गांव या मोहल्ले में नल-जल योजना चल रही है या बंद पड़ी है? अपना जिला और स्थिति कमेंट में बताएं, ताकि लोगों की समस्याएं सामने आ सकें।

#जनसमस्या

बिहार के 537 अंचलों में जमीन का काम ठप! रोजाना 16,550 आवेदन अटक रहे, दाखिल-खारिज से लेकर जमीन मापी तक पर असर......बिहार ...
24/10/2026

बिहार के 537 अंचलों में जमीन का काम ठप! रोजाना 16,550 आवेदन अटक रहे, दाखिल-खारिज से लेकर जमीन मापी तक पर असर......

बिहार के सभी 537 अंचल कार्यालयों में जमीन से जुड़े आम लोगों के काम बुरी तरह प्रभावित हैं। अंचल अधिकारी (CO) और राजस्व अधिकारी (RO) ने 13 अक्टूबर से डिजिटल डोंगल बंद कर दिए हैं। इससे परिमार्जन, दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) और जमीन मापी के ऑनलाइन आवेदन आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, रोजाना करीब 10,000 परिमार्जन, 5,500 म्यूटेशन और 1,050 जमीन मापी के आवेदन अटक रहे हैं।

अंचल कार्यालयों के चार प्रमुख राजस्व कर्मी वर्ग—CO, RO, राजस्व कर्मचारी और अमीन—अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। अमीन 6 अक्टूबर और राजस्व कर्मचारी 8 अक्टूबर से हड़ताल पर हैं, जबकि CO-RO ने 13 अक्टूबर से डिजिटल डोंगल बंद कर काम रोक दिया। अधिकारियों की मुख्य मांग है कि उनके खिलाफ सीधे FIR या गिरफ्तारी से पहले सक्षम स्तर की अनुमति को लेकर गृह विभाग स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी करे। बिहार राजस्व सेवा संघ (बिरसा) के अध्यक्ष आनंद कुमार ने भी कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया में कानूनी स्पष्टता की जरूरत बताई है।

इसका असर जमीन मालिकों और खरीदारों पर पड़ रहा है। दाखिल-खारिज नहीं होने से जमीन की खरीद-बिक्री, होम लोन और कृषि लोन जैसे काम अटक सकते हैं। भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र (LPC) नहीं बनने से सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी परेशानी हो सकती है। इस विवाद का एक अहम पहलू जमीन की रजिस्ट्री से जुड़ा नियम भी है। 16 फरवरी को निबंधन विभाग ने जमीन की अद्यतन जानकारी लेने का विकल्प दिया था, लेकिन इसे अनिवार्य नहीं रखा गया। ऐसे में रजिस्ट्री के बाद दस्तावेजों को लेकर विवाद होने पर अंचल अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।

मुख्य बातें:

- बिहार के सभी 537 अंचलों में जमीन से जुड़े काम प्रभावित हैं।

- रोजाना करीब 10,000 परिमार्जन, 5,500 म्यूटेशन और 1,050 मापी आवेदन अटक रहे हैं।

- CO-RO, राजस्व कर्मचारी और अमीन अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।

- अधिकारियों की मांग है कि FIR या गिरफ्तारी से पहले कार्रवाई की स्पष्ट प्रक्रिया तय हो।

- जमीन की खरीद-बिक्री, बैंक लोन और LPC से जुड़े कामों पर असर पड़ रहा है।

आपके इलाके में भी अंचल कार्यालय का काम रुका है? बताएं कि आपको किस काम में परेशानी हो रही है। इस खबर को जमीन से जुड़े दूसरे लोगों तक भी पहुंचाएं।

#अंचलकार्यालय #राजस्वविभाग

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Kidwaipuri, Adarsh Colony
Patna
800001

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