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15/10/2024

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ॐ शांति 💐💐
10/10/2024

ॐ शांति 💐💐

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने झारखंड में 'गो गो दीदी योजना' की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य राज्य की महिलाओं को आर्थिक मदद...
09/10/2024

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने झारखंड में 'गो गो दीदी योजना' की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य राज्य की महिलाओं को आर्थिक मदद और सशक्तिकरण की दिशा में अग्रसर करना है। इस योजना के तहत हर महीने की 11 तारीख को ₹2100 की राशि महिलाओं के बैंक खातों में भेजी जाएगी। बीजेपी का दावा है कि यह योजना राज्य में महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सुधारने में सहायक होगी और उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन लाएगी।

हालांकि, इस योजना की शुरुआत के बाद राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए रोकने का प्रयास किया है। हेमंत सोरेन और उनके समर्थक आरोप लगा रहे हैं कि यह योजना चुनावी माहौल को प्रभावित करने के उद्देश्य से लाई गई है। उनका कहना है कि आचार संहिता लागू होने के कारण ऐसी किसी भी योजना का कार्यान्वयन सही नहीं है और यह नियमों का उल्लंघन है। इसलिए उन्होंने इस योजना पर रोक लगाने के लिए विभिन्न उपाय किए हैं।

दूसरी ओर, बीजेपी के नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री के इस कदम की कड़ी आलोचना की है। मरांडी का कहना है कि यह योजना महिलाओं के हित में है और इसे किसी भी कीमत पर रोका नहीं जाएगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि राज्य की महिलाओं को इस योजना का लाभ जरूर मिलेगा, चाहे इसके लिए कितना भी संघर्ष करना पड़े। उनके अनुसार, यह योजना महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने के लिए लाई गई है और इसे रोकने का कोई भी प्रयास अस्वीकार्य है।

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह सिर्फ राजनीतिक स्वार्थ और अपने पार्टी हितों के लिए इस योजना को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। मरांडी ने कहा कि बीजेपी की यह योजना पूरी तरह से महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित है और इसे लागू करने से राज्य की महिलाओं को एक नई दिशा मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी इस योजना को पूरी तरह से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसे सफलतापूर्वक लागू किया जाएगा, भले ही इसके खिलाफ कितनी भी बाधाएं खड़ी की जाएं।

कुल मिलाकर, यह योजना झारखंड की राजनीति में एक नया मोड़ ला रही है। जहां बीजेपी इसे महिलाओं की भलाई के लिए एक बड़ा कदम मान रही है, वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विपक्षी दल इसे आचार संहिता के उल्लंघन के रूप में देख रहे हैं। इसके बावजूद, बीजेपी ने साफ कर दिया है कि वह इस योजना को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी, और बाबूलाल मरांडी ने इसकी सफलता की गारंटी दी है।

08/10/2024

भाजपा झारखंड की नेत्री श्रीमती रागिनी सिंह ने भारतीय जनता पार्टी की हरियाणा में जीत की हैट्रिक का जश्न अपने कार्यालय में बड़े धूमधाम से मनाई। इस अवसर पर उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर जलेबी बनाई और जीत की इस खुशी को साझा किया। यह खास आयोजन भाजपा की लगातार तीन बार की जीत की प्रतीकात्मक खुशी के रूप में आयोजित किया गया था।

श्रीमती रागिनी सिंह ने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर जलेबी बनाने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। कार्यकर्ताओं के बीच जोश और उमंग की लहर थी, और सबने इस जीत को भाजपा के अथक प्रयासों और पार्टी की विचारधारा की जीत बताया। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह जीत न केवल हरियाणा की है, बल्कि पूरे देश में भाजपा के प्रति जनता के विश्वास और प्रेम का प्रतीक है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इस जीत के पीछे कार्यकर्ताओं की मेहनत, समर्पण और अनुशासन है, और यह भाजपा की विचारधारा की सच्ची जीत है। जलेबी का आयोजन, भारतीय मिठाइयों में विशेष स्थान रखने वाली इस मिठाई के माध्यम से, एक प्रतीकात्मक तरीका था, जिससे उन्होंने अपनी खुशी का इजहार किया।

कार्यकर्ताओं ने भी इस मौके पर रागिनी सिंह के साथ खुशी मनाई, और सबने मिलकर जलेबी खाई। हर किसी के चेहरे पर खुशी और संतोष झलक रहा था। इस अवसर पर रागिनी सिंह ने कहा कि भाजपा का हरियाणा में लगातार तीसरी बार जीतना इस बात का प्रमाण है कि पार्टी की नीतियां और नेतृत्व सही दिशा में हैं। यह जीत पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच के अटूट विश्वास और एकजुटता का परिणाम है।

रागिनी सिंह ने अपने समर्थकों से यह अपील भी की कि वे इसी तरह कड़ी मेहनत करते रहें और आने वाले चुनावों में भी भाजपा को इसी तरह सशक्त बनाएं। इस जश्न के दौरान कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर पार्टी की आगे की रणनीतियों पर भी चर्चा की। उन्होंने हरियाणा की जनता का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह जीत जनता के समर्थन का परिणाम है।

जलेबी का यह मीठा आयोजन सिर्फ पार्टी के लिए खुशी का प्रतीक नहीं था, बल्कि यह कार्यकर्ताओं के लिए एक साथ मिलकर जीत की मिठास को साझा करने का अवसर भी था। इस अवसर पर रागिनी सिंह ने पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की भी सराहना की और उन्हें भविष्य में भी इसी तरह समर्पण से काम करने की प्रेरणा दी।

समारोह में चारों ओर उत्साह का माहौल था और कार्यकर्ताओं ने भाजपा के नारे लगाए। रागिनी सिंह ने कहा कि यह जीत उन सभी के लिए एक प्रेरणा है और आगे भी ऐसे ही परिश्रम और दृढ़ संकल्प के साथ काम करना होगा।
Ragini Singh Sanjeev Singh

08/10/2024

राज सिन्हा का विधानसभा टिकट खतरे में? लोकसभा चुनाव में पार्टी उम्मीदवार को समर्थन न देने की चर्चा

08/10/2024

झरिया की राजनीति में उबाल: किसके हाथ लगेगा टिकट का पासा?

झरिया विधानसभा क्षेत्र में इस बार राजनीति की बिसात पर शतरंज की चालें तेजी से चल रही हैं। हर बार की तरह इस बार भी चुनावी मौसम आते ही नेता, कार्यकर्ता और संभावित उम्मीदवारों ने अपनी कमर कस ली है। झरिया, जो कि अपने कोयला खदानों और उद्योगों के लिए जाना जाता है, अब राजनीतिक उठापटक का भी गवाह बन रहा है। इस बार का विधानसभा चुनाव खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में झरिया की राजनीतिक स्थिति में कई परिवर्तन हुए हैं।

राजनीतिक दलों ने अपने संभावित उम्मीदवारों को टिकट देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, और इसी के साथ टिकट के लिए जोर-आजमाइश भी तेज हो गई है। चाहे वह राष्ट्रीय पार्टियां हों या क्षेत्रीय, हर कोई इस बार झरिया से अपनी जीत सुनिश्चित करना चाहता है। चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नेता अपने-अपने समर्थकों के साथ जोड़-तोड़ कर रहे हैं। स्थानीय नेता जनता के बीच जाकर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिशों में लगे हुए हैं।

टिकट की इस दौड़ में वर्तमान विधायक से लेकर नए चेहरों तक सभी अपनी किस्मत आजमाने में लगे हैं। सत्ताधारी पार्टी के कई नेता भी एक दूसरे को पछाड़कर टिकट हासिल करने की होड़ में हैं। झरिया की राजनीति में पिछले कुछ समय से कई ऐसे मुद्दे रहे हैं जो विधानसभा चुनावों को प्रभावित कर सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं: कोयला खदानों से जुड़ी समस्याएं, विस्थापन, प्रदूषण, और बुनियादी सुविधाओं की कमी। जनता के बीच ये मुद्दे चर्चा का विषय बने हुए हैं, और हर नेता अपनी चुनावी रणनीति को इन्हीं मुद्दों पर केंद्रित कर रहा है।

वर्तमान विधायक की कार्यशैली पर भी जनता की नजरें टिकी हुई हैं। उनके कामकाज से संतुष्ट जनता जहां उन्हें फिर से मौका देने के मूड में नजर आ रही है, वहीं कुछ लोगों में असंतोष भी दिखाई दे रहा है। ऐसे में विरोधी दलों के पास मौका है कि वे जनता की नाराजगी का फायदा उठाकर अपनी स्थिति मजबूत करें। टिकट की दौड़ में नए चेहरों की एंट्री ने मुकाबले को और भी रोचक बना दिया है। युवा नेता और कुछ उद्योगपतियों के चुनावी मैदान में उतरने से राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।

झरिया की राजनीति में उबाल आने का एक और कारण जातीय समीकरण भी है। चुनावी विश्लेषक मानते हैं कि जातीय समीकरणों का प्रभाव इस बार के चुनावों में प्रमुख भूमिका निभाएगा। विभिन्न जातियों और समुदायों के बीच समर्थन जुटाने के लिए नेता कई तरह की योजनाएं और वादे कर रहे हैं। इस बीच टिकट के लिए दावेदार नेताओं ने अपने हाईकमान से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। दिल्ली और रांची के राजनीतिक गलियारों में झरिया के टिकट को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हर कोई चाहता है कि पार्टी उन्हें ही टिकट दे, ताकि वे अपने क्षेत्र में जीत दर्ज कर सकें।

राजनीतिक पार्टियों के लिए यह फैसला करना आसान नहीं है कि किसे टिकट दिया जाए। उम्मीदवार की लोकप्रियता, क्षेत्र में उसकी पकड़, और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए पार्टी नेतृत्व उम्मीदवारों का चयन करेगी। लेकिन टिकट की दौड़ में हर कोई अपना पक्ष मजबूत करने में जुटा है। इसके लिए कुछ नेता गुपचुप तरीके से राजनीतिक जोड़तोड़ में भी लगे हुए हैं। कोई अपने पुराने रिकॉर्ड को बेहतर ढंग से पेश कर रहा है, तो कोई अपने सामाजिक कामों का हवाला देकर जनता की सहानुभूति बटोरने में लगा है।

टिकट का फैसला जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे झरिया में राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। हर गली, हर चाय की दुकान पर चुनावी चर्चाओं का माहौल गर्म हो चुका है। जनता भी यह जानने के लिए उत्सुक है कि आखिर किसे टिकट मिलेगा और कौन उनके सामने वोट मांगने आएगा। चुनावी पंडितों का मानना है कि इस बार का चुनाव झरिया की राजनीति में नई दिशा तय करेगा। टिकट मिलने के बाद चुनावी रणनीतियां और भी आक्रामक हो जाएंगी, और हर उम्मीदवार अपने-अपने प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।

झरिया के राजनीतिक परिदृश्य को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि इस बार का चुनावी दंगल काफी रोमांचक और अप्रत्याशित होगा। टिकट किसे मिलेगा, यह सवाल अभी भी हवा में लटका हुआ है, लेकिन एक बात साफ है: टिकट पाने वाला उम्मीदवार ही नहीं, बल्कि पूरा चुनावी क्षेत्र भी इस बार उबाल पर है।

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